आप वीडियोज के जरिए ऑनलाइन कक्षाओं को प्रभावी कैसे बना सकते हैं?

नई पीढ़ी अपने फ़ोन से चिपकी रहती है और लगातार वीडियोज देखती रहती है। रोजमर्रा के जीवन पर वीडियोज के असर को ध्यान में रखते हुए इस प्लेटफॉर्म का शिक्षा प्रणाली में भी शामिल होना स्वाभाविक है। नीचे ऐसे तरीके दिए गए हैं जिससे क्लासरूम में वीडियोज शामिल करके आपके स्टूडेंट्स को अपने स्टडी मटेरियल को प्रभावी तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।

 

  1. सिर्फ पुस्तकों का इस्तेमाल करने के मुकाबले वीडियोज से ज्यादा लुभावना संवेदी अनुभव मिलता है। बच्चे संवेदी अनुभव से ज्यादा बेहतर ढंग से जुड़ पाते हैं क्योंकि वीडियोज दिमाग को शांत रखकर आसान भाषा और बढ़िया चित्रों का इस्तेमाल करके जानकारी देते हैं।

 

  1. उन्हें कहीं से भी, किसी भी उपकरण से देखा जा सकता है जिससे वे स्टूडेंट्स के लिए बेहतर संसाधन बन जाते हैं। भारी भरकम पुस्तकें उठाने के मुकाबले वीडियोज ज्यादा सुविधाजनक होते हैं।

 

  1. वीडियोज से जानकारी को ज्यादा वक्त तक ध्यान में रखा जा सकता है। वीडियोज याद रखना आसान होता है क्योंकि जानकारी संक्षेप में दी जाती है। वीडियोज में बेहतर समझ के लिए जरूरी हिस्सों पर आसानी से ध्यान केन्द्रित किया जा सकता है और उन्हें विस्तार से समझाया जा सकता है।

 

  1. वीडियोज को प्ले और पॉज किया जा सकता है जिससे वे फ्लेक्सिबल हो जाते हैं। सिर्फ प्रिंट मटेरियल का इस्तेमाल करके स्टूडेंट्स के लिए उन्हें जरूरी लगने वाले हर पेज को मोड़कर रखना पड़ सकता है जो कि उनके लिए बहुत ही परेशानी भरा हो सकता है। अतिरिक्त संसाधन के रूप में उनके पास वीडियोज होने पर उन्हें सिर्फ टाइम स्टैम्प याद रखने की जरूरत पड़ती है।

 

पाठ्यक्रम में वीडियोज शामिल करने से स्टूडेंट्स को बहुत ज्यादा बोझ तले दबे बिना या अपना ध्यान भटकाए बिना जानकारी सीखने में मदद मिलती है। ऑनलाइन क्लासेस से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए हमारे वेबिनार में शामिल हो जाएँ-https://www.dellaarambh.com/webinars/ [dellaarambh.com]



ऑनलाइन लर्निंग ने शिक्षक की भूमिका को कैसे पुनः परिभाषित किया है?

इस नई सामान्य स्थिति में, शिक्षकों की भूमिका क्लासरूम से कहीं ज्यादा आगे बढ़ गई है। भले ही स्टूडेंट्स अब भी अपने घरों में ही हैं, लेकिन शिक्षकों को क्लासरूम का आदर्श परिवेश बनाने में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों ने विजुअल, एनिमेटेड वीडियो और खेल-आधारित प्रश्नोत्तरी के जरिए विद्यार्थियों के लिए मनोरंजक और संवादात्मक लर्निंग अनुभव बनाकर पाठ में अपने विद्यार्थियों की रूचि बनाए रखने के नए तरीके खोज लिए हैं। यहाँ पर ऐसे कुछ अन्य तरीके हैं जिनके जरिए शिक्षकों ने कक्षाओं की सीमाओं को पुनः परिभाषित किया है:

 

ई-लर्निंग और वैयक्‍तिकीकरण में परिवर्तन

ई-लर्निंग के जरिए शिक्षकों ने इनेब्लर के रूप में तकनीक का इस्तेमाल करके स्टूडेंट्स को ई-लर्निंग में परिवर्तित होने में मदद की है। अलग-अलग विद्यार्थियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए वैयक्तीकृत शिक्षण की शुरुआत की गई है। बच्चे अपनी खुद की रफ्तार से सीखना जारी रख सकते हैं और सामग्रियों को सुसंगत तरीके से समझ सकते हैं।

 

विषय-वस्तु निर्माता के रूप में शिक्षक:

शिक्षक विद्यमान विषय-वस्तु पर निर्भर ना होकर विषय-वस्तु निर्माता बनने की कोशिश कर रहे हैं। स्टूडेंट्स के लिए नए मनोराजंक, संवादात्मक विषय-वस्तु तैयार करके उन्होंने विद्यार्थियों के समग्र विकास में मदद की है।

 

सवाल और दबाव:

नई परिस्थितयों में, शिक्षकों ने माता-पिता के सवालों और ऑनलाइन लर्निंग के दबाव को संभालने की निपुणता हासिल कर ली है। शिक्षक शिक्षा की नई विधियों को सीखते हुए खुद ही विद्यार्थी बन गए हैं।

 

शिक्षक दिवस के उपलक्ष में, हम उन शिक्षकों की सराहना करते हैं जिन्होंने अपने विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए खुद को समर्पित कर दिया है। यहाँ से डेल वेबिनार में शामिल हो जाएँ: https://www.dellaarambh.com/webinars/

 

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं!



बच्चों को पसंद आने वाली प्रभावी ऑनलाइन लर्निंग कैसे तैयार की जाए

स्टूडेंट के लिए कक्षा का अनुभव पूरी तरह बदल गया है। अपना टिफिन बॉक्स और कैंटीन के वडापाव बाँटना, किसी टीचर के न आने पर कक्षा में ऐसे ही 2 मिनट की पार्टियाँ, और गेम पीरियड में फुटबॉल मैच के चलते हंसी-मजाक ये सब अब पुराने दिनों की बात हो गई है।

 

सब कुछ डिजिटल हो गया है। बहुत कुछ बदलने के बावजूद यहाँ ऐसे कुछ तरीके दिए गए हैं जिससे सुनिश्चित किया जा सकता है कि लर्निंग में बदलाव न आएँ। 

  1. निर्धारित जगह: बेंचों से लेकर स्कूल की घंटी तक, हर चीज से कक्षा का परिवेश तैयार करने में मदद मिलती है। इसी तरह से खुद के लिए एक निर्धारित जगह होना, जानकारी प्राप्त करने और उसे समझने के लिए स्थान तैयार करने में बहुत ही जरूरी होता है। 
  2. ध्यान भटकना: ऑनलाइन क्लास में थोड़ी देर बाद बोर न होना बहुत ही मुश्किल होता है। बैचेन होना तो कुछ भी नहीं है बल्कि स्टूडेंट्स अपना मन बहलाने के लिए सोशल मीडिया देखने लगते हैं और ऐसे ही कुछ भी स्क्रॉल करने लगते हैं। आप ऐसे ऐप ब्लॉकर या एक्सटेंशन इन्स्टॉल कर सकते हैं जो दिन के किसी खास समय में कुछ ऐप्स का एक्सेस रोक देते हैं।
  3. जिज्ञासा जगाएँ: ऑनलाइन कक्षा में स्टूडेंट-टीचर का संबंध स्थिर होता है और आँखों से संपर्क नहीं होता, और जब उन पर नजर रखने वाला कोई नहीं हो तो कॉन्सेप्ट्स न समझना बहुत ही आसान हो जाता है। अपने संदेह पूछने और बाद में विश्लेषण करने और समझने हेतु उनके लिए लेक्चर रिकॉर्ड करने का निवेदन करने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करें।
  4. स्क्रीन का समय प्रबंधित करें: नए माध्यम में स्टूडेंट्स को दिन में घंटों तक स्क्रीन पर ध्यान केन्द्रित करना पड़ता है, जो कि कम समय के लिए भी नुकसानदायक है। डिजिटल दुनिया से नियमित रूप से विराम लेना बहुत जरूरी है- शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए शाम को टहलना या बैडमिंटन खेलना मददगार होता है। 

हमारे वेबिनार में शामिल होकर सीखें कि लर्निंग आपके बच्चों के लिए भी मजेदार कैसे हो सकती है- https://www.dellaarambh.com/webinars/