BYOD: वह शिक्षा प्रवृत्ति जिसे आप अनदेखा नहीं कर सकते

 

अपने बच्चे के लिए घर पर पीसी लाना आपके बच्चे के लिए उसके मनपसंद खिलौने लाने जैसा है | हर दिन आपका बच्चा एक क्लिक के साथ दुनिया का अध्ययन करता है, पढ़ता है और दुनिया की खोज करता है - सोचिये आपके बच्चे कितना उत्साहित महसूस करेंगे जब वे अपना पीसी स्कूल में भी इस्तेमाल कर सकें |

BYOD या अपनी खुद की डिवाइस लाने की प्रवृत्ति पूरे विश्व में बढ़ रही है | यहाँ वह सब कुछ है जो आपको जानना चाहिए |

BYOD क्या है ?

हाल के एक सर्वेक्षण में, प्रमुख सॉफ्टवेयर निर्माता एडोब ने निष्कर्ष निकाला कि लगभग 85% शैक्षिक संस्थानों का मानना ​​है कि एक ऐसा वातावरण प्रदान करना महत्वपूर्ण है जिसमें प्रौद्योगिकी और शिक्षा का सही मिश्रण मौजूद हो | सभी उम्र के बच्चों के लिए दैनिक सीखने में तकनीक को सम्मिश्रित करने के लिए BYOD का अभ्यास आवश्यक है। [1]

यदि एक बार बुनियादी ढांचा यानी इन्टरनेट की सुविधा और पर्याप्त चार्जिंग पॉइंट्स तैयार हो जाता है , तो छात्रों को सिर्फ अपना पीसी स्कूल लाने की ज़रूरत पड़ेगी |

यह आपके बच्चों के लिए कैसे उपयोगी है?

पढ़ने के लिए कंप्यूटर के इस्तेमाल का लाभ उठाने के लिए आयु कोई बंधन नहीं है | यह लाभ और भी ज्यादा होता है यदि आपके बच्चे के पास खुद का पीसी हो ताकि वह कक्षा में सीख सके | बार बार उपयोग के साथ, बच्चे अपने पीसी के कामकाज से परिचित हो जाते हैं - उनका स्कूल में नई तकनीक चुनने का समय और प्रयास बचता है जिसका इस्तेमाल पढ़ने और असाइनमेंट करने में किया जा सकता है | इसके अलावा, बच्चों को निजी तौर पर जिम्मेदार महसूस होता है क्योंकि यह उनका खुद का पीसी है, बदले में अध्ययन में रुचि भी बढ़ती है | पत्रिकाएँ BYOD को एक ऐसी तरकीब के रूप में देखते हैं जिसमें “सभी छात्र अपने हाथों सीखते हैं “ एक ऐसा कौशल जिसकी हर बच्चे को आवश्यकता है एक बेहतर भविष्य विकसित करने के लिए | [2]

भविष्य में क्या है?

भविष्य हमारे जीवन के हर पहलू में प्रौद्योगिकी को शामिल करने और तेज़ी से परिवर्तनों के अनुकूल होने के बारे में है। इसीलिए यह आजकल के बच्चों को युवा शुरू करने में मदद करता है | स्कूलों में आईटी रूम्स बहुत अच्छी शुरुआत हैं और अधिकांश भारतीय स्कूलों में सामान्य हैं। अगला कदम यही होगा कि हर बच्चे के पास उसका अपना पीसी हो घर और स्कूल दोनों जगह इस्तेमाल करने के लिए जिससे कि एक ऐसा रूटीन का पालन किया जा सके जिसमें विषय को याद करने से ज्यादा विचारों को समझना और अधिक जानने के लिए उत्सुकता शामिल हो |