डेल आरंभ: क्यों, क्या और कैसे- अब तक का सफर

 

6 जून, 2016 का दिन था- यह वह दिन था जब हमने पूरे भारत के शहरों में, खासतौर पर मेरठ, रांची और नाशिक जैसे टियर 2 से टियर 4 वाले शहरों को लक्षित करके, पीसी शिक्षा प्रदान करने के लिए देश भर में डेल आरंभ लॉन्च किया था।

2016 में, भारत का दूरसंचार घनत्व 50.63% तक बढ़ गया था 1 पर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को तकनीक के बारे में अब भी संदेह था। और तब हमने कदम रखा।

ऐसा करने के लिए हमें रट्टा मारकर सीखने के पारंपरिक ढंग से दूर हटना पड़ा और सीखने के ऐसे तरीके की ओर बढ़ना पड़ा जो लुभावना और असरदार दोनों था। हमने मजेदार, लुभावने और व्यावहारिक तरीके से माताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों को पीसी कौशल सिखाने के लिए शिक्षकों के समूह का एक नेटवर्क तैयार किया।

 

तो हमारा सफ़र कैसा रहा?

हमारा सफर विद्यार्थियों, शिक्षकों और माताओं को पीसी का इस्तेमाल करने की जानकारी से सशक्त करने पर केन्द्रित है, जिससे वे शिक्षा के जरिए उनकी कुशलता बढ़ा सकें। हमने शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण का मान बढ़ाने हेतु शिक्षक प्रत्यायन केंद्र (CENTA) के साथ भागीदारी की, और साथ ही हमने शिक्षा पेशेवरों के लिए एक मजेदार प्रतिस्पर्धी ओलिंपियाड भी लॉन्च किया।

पॉलिसी हैक के जरिए हमने शिक्षकों को ऐसी समस्याओं का, जिनका सामना शिक्षकों को कक्षा के भीतर और बाहर करना पड़ता है, के नवप्रवर्तक समाधान निकालने की चुनौती दी। इसके अलावा टाटा क्लास-एज के साथ हमारी भागीदारी से हम डिजिटल ट्रेनिंग को स्कूलों में ले जा पाए हैं ताकि हम शिक्षकों को कक्षाओं में तकनीक लागू करने के लिए जरुरी जानकारी दे सकें।

तो भविष्य कैसा नजर आता है?

तीन वर्षों में हमने UNESCO MGIEP द्वारा तैयार किए गए प्रशिक्षण अंतर्वस्तु वाले फ्रेमर-स्पेस प्लेटफ़ॉर्म के जरिए शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए UNESCO महात्मा गाँधी शांति एवं सतत विकास शिक्षा संस्थान (UNESCO-MGIEP) के साथ भागीदारी की है। यह तीन दिनों का वर्कशॉप होगा जिसके बाद 200 घंटों की ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा।

और केवल इतना ही नहीं...

 

4,507 लाभ प्राप्त होने वाले स्कूलों, 83,501 प्रशिक्षित और प्रमाणित शिक्षकों, और 1,13,708 प्रशिक्षित माताओं के साथ इन प्रशिक्षणों ने हमारे संपूर्ण देश पर एक व्यापक प्रभाव डाला है। भविष्य की ओर देखते हुए, आरंभ के लिए 2020 एक निर्णायक वर्ष बनने वाला है क्योंकि ये प्रशिक्षित शिक्षक अब और ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण देंगे- जिससे ऐसे लोगों की श्रंखला बनेगी जो पीसी का इस्तेमाल ना केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि जीवन में भी करने के लिए सुसज्जित और आत्मविश्वासी होंगे।