शिक्षण का सही, रट्टा ना मारने वाला तरीका

भारतीय शिक्षा प्रणाली के विद्यार्थी रट्टा मारकर सीखने से परिचित हैं, यह याद रखने की ऐसी तकनीक है जिससे विद्यार्थियों को पढ़ी हुई चीजें दोहराकर स्मरण और याद करने में मदद मिलती है। हालाँकि, सीखने की यह तकनीक अवधारणाओं को समझने की बजाय उन्हें याद करने पर जोर देती है।

बड़ी समस्या

भारतीय शिक्षा प्रणाली का अभ्यासक्रम परिभाषाओं, सूत्रों, और तथ्यों को याद करने पर ध्यान केन्द्रित करता है, जहाँ केवल 14% भारतीय कक्षाओं में ही पाठ्य-पुस्तकों के अलावा अन्य शिक्षण सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे भविष्य की रोजगार क्षमता पर असर पड़ता है, और अध्ययनों से भी पता चला है कि जनबल में से 25% से भी कम भारतीय स्नातक इंजीनियर रोजगार योग्य होते हैं।1

सच्चाई यह है कि विद्यार्थी किसी अवधारणा को वास्तविक जीवन में तभी प्रयुक्त कर पाएँगे जब वे उस अवधारणा को समझेंगे, ना कि  केवल याद करेंगे। यह ऐसी चीज है जिससे जनबल में मदद मिलेगी क्योंकि आज के ‘डिजिटल भारतियों’ के लिए सृजनात्मकता, गहन सोच, और जटिल समस्याओं को सुलझाने की कुशलताओं की सबसे ज्यादा माँग है।

 

 

इसका हल?

रट्टा मारकर सीखने से दूर जाना। इसके लिए हम हर साल 10 जून को रट्टा-विरोधी दिवस इस आशय से मनाते हैं ताकि हम शिक्षण के सही, रट्टा ना मारने वाले तरीके को बढ़ावा दे सकें।

आज की तकनीक चालित दुनिया में पीसी शिक्षण से सीखने के सही तरीके को अंतर्निविष्ट करना संभव है। ऐसा निम्न से किया जा सकता है:

 

  • ई-पुस्तकें
    पाठ्यपुस्तकों और नोट्स के वर्तमान आकार के कारण विद्यार्थी इनसे डर सकते हैं, इसलिए यह जरुरी है कि छोटी, संक्षिप्त, और संवादात्मक ई-पुस्तकें और पीडीएफ प्रदान किए जाएँ।

  • संवादात्मक मीडिया
    ऑडियो, वीडियो और एनीमेशन से विद्यार्थियों का ध्यान लगा रहता है, जिससे सुनिश्चित होता है कि अवधारणा उनके दिमाग में ज्यादा समय तक रहे।

  • प्रोजेक्ट्स और प्रेजेंटेशन्स
    व्यक्तिगत प्रेजेंटेशन से विद्यार्थियों की संवाद कुशलता सुधारने के साथ साथ उनके अवधारणा को समझने के स्तर को प्रकट करने में मदद मिलती है।

  • सहपाठी शिक्षण
    गूगल डॉक्यूमेंट्स और वर्चुअल डिबेट्स जैसे ऑनलाइन टूल्स के जरिए विद्यार्थी मिलकर कार्य कर सकते हैं, रचना कर सकते हैं, और एक दूसरे से सीख सकते हैं।

  • शंका दूर करने के सेशन
    प्रश्नोत्तरी और प्रतिक्रिया पत्रों के जरिए विद्यार्थी की अवधारणा की समझ को मापा जा सकता है, और परिणामी शंकाओं को भी दूर किया जा सकता है।

  • गेस्ट लेक्चरर
    ऑनलाइन शिक्षण में कोई भौतिक प्रतिबंध नहीं होते, जिससे दुनिया के अलग-अलग भागों के गेस्ट लेक्चरर विद्याथियों को वर्चुअली पढ़ा सकते हैं।

 

आप हमारे ऑनलाइन शिक्षण  वेबिनार्स के जरिए इस मनोहर और संवादात्मक शिक्षण को आज ही अपना सकते हैं।